Uttar Pradesh के Greater Noida से एक ऐसी दास्तां सामने आई है जो आपकी आंखों में आंसू और सिस्टम के खिलाफ गुस्सा भर देगी।

इसे 'हादसा' कहना गलत होगा, यह असल में बिल्डर्स की लापरवाही और सरकारी तंत्र की नाकामी का नतीजा है। एक जवान बेटा, Yuvraj, अपनी आंखों के सामने अपने पिता और Police को देखते हुए ठंडे पानी में दम तोड़ गया।

Rescue teams and a crane at the 30-foot deep water-filled pit in Greater Noida where Yuvraj lost his life.

यह खबर सिर्फ एक मौत की नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि क्या भारत के सबसे आधुनिक 'कॉर्पोरेट हब' में इंसान की जान की कोई कीमत है?

कैसे शुरू हुआ मौत का तांडव? (The Incident)

ग्रेटर नोएडा के एक निर्माणाधीन इलाके में प्राइवेट बिल्डर्स ने 30 फुट गहरा गड्ढा खोद रखा था। नियम के मुताबिक वहां बैरिकेडिंग और चेतावनी के बोर्ड होने चाहिए थे, लेकिन वहां 'मौत का जाल' खुला पड़ा था। Yuvraj की कार अचानक अनियंत्रित होकर उस पानी से लबालब भरे गड्ढे में जा गिरी।

4 घंटे तक मौत से जंग: मोबाइल की टॉर्च से मांगा था सहारा

हादसा होने के बाद Yuvraj हिम्मत नहीं हारा। कार पानी में डूब रही थी, लेकिन वह किसी तरह कार की छत पर चढ़ गया। रात के अंधेरे में उसने अपने मोबाइल की टॉर्च जलाई और घंटों तक ऊपर खड़े लोगों को सिग्नल देता रहा। उसके पिता किनारे पर खड़े होकर चीखते रहे, गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन सिस्टम की सुस्ती ने सब खत्म कर दिया।

किनारे पर खड़ी रही NDRF और Police , पर पानी में कोई नहीं उतरा

इस घटना का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि वहां UP Police, NDRF और SDRF की टीमें मौजूद थीं। लेकिन बताया जा रहा है कि पानी बहुत ठंडा था और अंदर लोहे की छड़ें (Iron Rods) थीं, इस वजह से कोई भी जवान पानी में कूदने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

सोचिए, एक पिता अपने बेटे को डूबते देख रहा है और हाई-टेक मशीनरी वाली रेस्क्यू टीमें सिर्फ 'साइडलाइन्स' पर खड़ी होकर तमाशा देख रही थीं। अंत में, सर्दी और सदमे की वजह से Yuvraj ने वहीं दम तोड़ दिया।

कॉर्पोरेट लापरवाही और सिस्टम का फेलियर (Corporate Negligence)

इस मामले में बिल्डर्स की मनमानी साफ नजर आती है। बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के इतना गहरा गड्ढा छोड़ना सीधे तौर पर 'गैर-इरादतन हत्या' है।

  1. कोई बैरिकेडिंग नहीं: अगर वहां फेंसिंग होती, तो कार अंदर गिरती ही नहीं।
  2. लाइटिंग की कमी: रात के वक्त वहां कोई लाइट नहीं थी जिससे गड्ढा नजर आता।
  3. लापरवाह रेस्क्यू: जब NDRF जैसी टीमें भी जोखिम लेने से डरने लगें, तो आम आदमी किसके भरोसे रहे?

जनता का आक्रोश और कैंडल मार्च (Public Outrage)

इस घटना के बाद ग्रेटर नोएडा के निवासियों में भारी गुस्सा है। लोगों ने सड़कों पर उतरकर Candle March निकाला और Yuvraj के लिए इंसाफ की मांग की। भारी दबाव के बाद Police ने डेवलपर्स के खिलाफ 'गैर-इरादतन हत्या' (Culpable Homicide) की धाराओं में FIR दर्ज की है।

हादसा नहीं, 'मर्डर' है यह!

लोग सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर पूछ रहे हैं कि क्या विकास का मतलब सिर्फ ऊंची इमारतें बनाना है? क्या इन इमारतों की नींव मासूमों की जान लेकर रखी जाएगी? Yuvraj एक प्रोफेशनल था, उसका पूरा भविष्य सामने था, लेकिन सिस्टम की कायरता ने उसे छीन लिया।


Greater Noida की इस घटना ने हमें एक कड़वा सच दिखाया है। हमारे पास बड़ी-बड़ी रेस्क्यू टीमें हैं, करोड़ों के प्रोजेक्ट्स हैं, लेकिन एक डूबते हुए इंसान को बचाने की इच्छाशक्ति नहीं है। Yuvraj तो चला गया, लेकिन उसकी मौत उन सभी के चेहरे पर एक तमाचा है जो सुरक्षा के नियमों को ताक पर रखते हैं।

क्या आपको लगता है कि उन रेस्क्यू टीम्स पर भी एक्शन होना चाहिए जो किनारे खड़ी होकर तमाशा देख रही थीं? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।