Neemuch Police Shock: Head Constable Hoshiyar Singh की सुसाइड और DGP को लिखी चिट्ठी ने खोली 'System' की पोल
Neemuch Police Head Constable Hoshiyar Singh commits suicide. 3-page letter to DGP exposes corruption and bribery for duty roster.
Madhya Pradesh के Neemuch जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने खाकी वर्दी पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
एक Head Constable ने सिस्टम के भ्रष्टाचार (Corruption) से तंग आकर अपनी जान दे दी।
Head Constable Hoshiyar Singh, जिन्होंने February 8,
2026 को ज़हर (Poison) खाकर आत्महत्या कर
ली, अपने पीछे एक
3 पन्नों का सुसाइड नोट
(Suicide Note) छोड़
गए हैं। यह चिट्ठी
किसी आम इंसान को
नहीं, बल्कि राज्य के पुलिस मुखिया
यानी DGP (Director
General of Police) को
संबोधित है।

इसमें
उन्होंने अपने ही विभाग
(Department) के
अंदर चल रहे "घूसखोरी
के खेल" (Bribery Racket)
का पर्दाफाश किया है। आइये
जानते हैं इस चिट्ठी
में लिखे उन काले
सच को।
The Incident: 8 फरवरी
की वो काली रात
घटना
Neemuch पुलिस लाइन या थाने
से जुड़ी है। Hoshiyar Singh काफी समय से
तनाव (Stress) में थे। February 8 को उन्होंने
ज़हर खा लिया। उन्हें
तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया,
लेकिन उनकी जान नहीं
बचाई जा सकी।
उनकी
मौत के बाद, उनकी
जेब या घर से
एक Suicide Note
बरामद हुआ। जैसे ही
इस चिट्ठी का मजमून (Content) सामने आया,
पुलिस महकमे में हड़कंप मच
गया।
The Letter: DGP के
नाम आखिरी पैगाम
Hoshiyar Singh ने
अपने 3 पन्नों के सुसाइड नोट
में Systemic
Corruption की पोल खोल दी
है। उन्होंने लिखा है कि
कैसे पुलिस विभाग में ईमानदारी से
काम करना मुश्किल हो
गया है।
Key Allegations (मुख्य
आरोप):
- Bribes
for Duty: उन्होंने
आरोप लगाया है कि जूनियर ऑफिसर्स को अपनी मनचाही जगह ड्यूटी लगवाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।
- Rate
Card: चिट्ठी में दावा किया गया है कि Duty Roster में नाम डलवाने या रोजनामचा (General
Diary/GD) में
एंट्री के लिए ₹5,000 से ₹10,000 तक की रिश्वत (Bribe) मांगी जाती है।
- Harassment:
जो पैसा नहीं देता, उसे परेशान किया जाता है या ऐसी जगह ड्यूटी लगा दी जाती है जहां काम करना मुश्किल हो।
यह आरोप बेहद गंभीर
हैं क्योंकि यह किसी बाहरी
व्यक्ति ने नहीं, बल्कि
विभाग के ही एक
Head Constable ने
अपनी जान देकर लगाए
हैं।
Police Department में
खलबली
इस घटना के बाद
Neemuch से लेकर Bhopal तक पुलिस मुख्यालय
हिल गया है।
- क्या वाकई पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के लिए पैसा चलता है?
- क्या छोटे कर्मचारियों का शोषण (Exploitation)
हो रहा है?
SP (Superintendent of Police) और अन्य
आला अधिकारियों ने मामले की
गंभीरता को देखते हुए
जांच (Inquiry) के आदेश दे
दिए हैं। लेकिन सवाल
यह है कि क्या
एक Head Constable
की मौत के बाद
ही सिस्टम की नींद खुलेगी?
वर्दी का दर्द : Hoshiyar Singh का जाना उनके परिवार के लिए कभी न भरने वाला घाव है। लेकिन उनकी मौत ने एक कड़वा सच समाज के सामने रख दिया है। अगर रक्षक ही अपने विभाग के भ्रष्टाचार से सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा?
हम उम्मीद करते हैं कि
DGP इस सुसाइड नोट को गंभीरता
से लेंगे और दोषियों के
खिलाफ सख्त कार्रवाई (Strict Action) करेंगे ताकि भविष्य में
किसी और Hoshiyar Singh को ऐसा कदम
न उठाना पड़े।