Advocate Priyanshu Srivastava ने Court की 5वीं मंजिल से कूदकर दी जान, 'Suicide Note' में Father पर लगाए गंभीर आरोप
Kanpur advocate Priyanshu Srivastava commits suicide from 5th floor of district court. His WhatsApp suicide note reveals shocking mental torture.
Kanpur से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने माता-पिता की सख्ती (Parenting) और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।
Kanpur District Court की पांचवीं मंजिल से कूदकर 23 साल के युवा वकील (Advocate) Priyanshu Srivastava ने अपनी जान दे दी।
इस घटना ने पूरे
शहर और लीगल कम्युनिटी
(Legal Community) को झकझोर कर रख दिया
है। लेकिन सबसे ज्यादा डराने
वाला है वह 2 पन्नों
का Suicide Note,
जो Priyanshu ने मौत से
ठीक पहले अपने WhatsApp Status पर लगाया था।
इस नोट में उन्होंने
अपने ही पिता (जो
खुद भी एक वकील
हैं) पर जिंदगी भर
मानसिक प्रताड़ना (Mental Torture) और अपमान (Humiliation) का आरोप
लगाया है।
आइये जानते हैं कि Priyanshu के उस आखिरी मैसेज में ऐसा क्या था जिसने उसे मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया।
WhatsApp 'Suicide Note' के खौफनाक खुलासे
Priyanshu का
सुसाइड नोट एक बेटे
की जिंदगी भर की घुटन
और दर्द की कहानी
है। उसने साफ तौर
पर लिखा कि उसके
पिता की हद से
ज्यादा सख्ती और हर बात
पर बेइज्जती ने उसकी जिंदगी
को नर्क बना दिया
था।
नोट
में लिखी गई कुछ
मुख्य और विचलित करने
वाली बातें इस प्रकार हैं:
1. Childhood Trauma: 'Mango Shake' और नंगा करके निकालना
Priyanshu ने
बचपन की एक ऐसी
खौफनाक याद (Traumatic Experience) का जिक्र किया
जिसने उसके दिमाग पर
गहरा असर डाला था।
- उसने लिखा कि जब वह सिर्फ 6 साल का था, तब उसने बिना पूछे फ्रिज से 'Mango Shake' (आम का जूस) पी लिया था।
- इस छोटी सी बात पर उसके पिता ने उसे नंगा (Stripped naked) करके घर से बाहर निकाल दिया था। इस घटना ने उसके मन में हमेशा के लिए एक हीन भावना (Inferiority
Complex) और डर भर दिया।
2. Verbal Abuse: 'नामर्द'
और 'हिजड़ा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल
अपने
पिता की गालियों और
तानों (Verbal Abuse) का जिक्र करते
हुए Priyanshu ने लिखा कि
वह घर के खर्च,
मोबाइल बिल, स्कूटर और
बिजली का बिल भरता
था।
- फिर भी उसके पिता घर के बाहर पड़ोसियों के सामने चिल्लाकर उसे "नामर्द (Unmanly)",
"हिजड़ा
(Eunuch)", और
"अपाहिज
(Crippled)" कहकर
बेइज्जत करते थे।
- हर बात पर उस पर शक किया जाता था—वह कहाँ जा रहा है, किससे बात कर रहा है—इस बात की लगातार निगरानी (Monitoring) की जाती थी जिससे उसे घुटन होने लगी थी।
3. Career & Identity Struggle: अपनी कोई पहचान नहीं
करियर
के मोर्चे पर भी Priyanshu भारी दबाव
(Pressure) में था।
- उसने 2025 में अपनी LLB पूरी की थी, लेकिन वह PCSJ का एग्जाम क्लियर नहीं कर पाया था।
- वह अपने पिता के अधीन (Under his father)
उनके ही चैंबर में काम कर रहा था।
- उसने अपने नोट में लिखा: "आज मैं लाचार हूँ क्योंकि मेरा अपना कोई घर या ऑफिस नहीं है। मैंने अपना जरूरी काम छोड़कर उनके काम पर फोकस किया, लेकिन आज उन्होंने पड़ोस में मेरी इज्जत मिट्टी में मिला दी।"
4. Forced Academics
उसने
बताया कि 9वीं क्लास
में वह Physical Education
लेना चाहता था, लेकिन पिता
ने उसे घर से
निकालने की धमकी देकर
जबरन Computer
Science दिलवाया। इस तरह के
फैसलों ने उसके जीवन
को दिशाहीन कर दिया था।
Last Words: "I lost, Papa won"
मरने
से पहले Priyanshu ने जो आखिरी
शब्द लिखे, वे किसी का
भी दिल चीर सकते
हैं। उसने लिखा:
- "I
lost, Papa won. Congratulations to him." (मैं हार
गया, पापा जीत गए। उन्हें बधाई।)
- "मेरी लाश को पिता हाथ भी न लगाएं।" (My
father should not even touch my body.)
- "भगवान करे किसी को मेरे जैसा पिता न मिले।" (I wish
no one gets a father like mine.)
इतने
दर्द के बावजूद, Priyanshu ने अपील की
कि उसके पिता के
खिलाफ कोई पुलिस कार्रवाई
(Police Action) न की जाए, ताकि
उसकी माँ और बहन
की जिंदगी खराब न हो।
उसने पेरेंट्स से भी एक
भावुक अपील की: "अपने
बच्चों को सिर्फ उतना
ही टॉर्चर करें जितना प्रेशर
वो बर्दाश्त कर सकें।"
Police Investigation
घटना
के तुरंत बाद Kanpur Police और DCP (East) Satyajeet
Gupta मौके पर पहुंचे। CCTV Footage में Priyanshu को छलांग लगाने
से पहले फोन पर
बात करते हुए देखा
गया है। पुलिस ने
उसका मोबाइल फोन और Digital Evidence (व्हाट्सएप स्टेटस) जब्त कर लिया
है। शव को पोस्टमार्टम
(Post-mortem) के
लिए भेज दिया गया
है और घटना की
गहराई से जांच चल
रही है।
Parents के
लिए एक कड़वा सबक
Kanpur का
यह केस सिर्फ एक
आत्महत्या नहीं, बल्कि "Toxic
Parenting" का एक बहुत ही
खौफनाक उदाहरण है। एक बच्चा
जिसे घर में प्यार
और सपोर्ट मिलना चाहिए, उसे बचपन से
सिर्फ बेइज्जती और गालियां मिलीं।
Priyanshu का
यह दर्द भरा खत
हर उस माता-पिता
के लिए एक चेतावनी
(Warning) है, जो अनुशासन (Discipline) के नाम
पर अपने बच्चों का
मानसिक उत्पीड़न करते हैं। एक
छोटी सी उम्र में
अपनी पहचान और सम्मान के
लिए तरसता हुआ एक होनहार
युवा आज सिस्टम और
समाज के कड़वे सच
की भेंट चढ़ गया।
